कर्मचारी संगठन भी जैतापुर प्रोजेक्ट के विरोध में उतरे--Jagran

Submitted by VK Gupta on Tue, 10/05/2011 - 8:16am

Dainik Jagran

कर्मचारी संगठन भी जैतापुर प्रोजेक्ट के विरोध में उतरे
ठ्ठ प्रणय उपाध्याय, नई दिल्ली जैतापुर परियोजना के विरोध में अब सरकारी कर्मचारी संगठन भी कूद पड़े हैं। ऊर्जा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े कर्मचारी संगठनों ने न केवल जैतापुर परियोजना को गलत बताया है, बल्कि नाभिकीय विद्युत उत्पादन क्षमता अगले बीस सालों में 13 फीसदी बढ़ाए जाने के फैसले का भी विरोध किया है। सरकारी उपक्रमों से जुड़े इंजीनियरों के मुताबिक बिना सोचे समझे किया जा रहा नाभिकीय विस्तार कार्यक्रम भी दाभोल और एनरॉन के रास्ते पर जा रहा है। सरकारी उपक्रम के कर्मचारी इस विरोध को धार देने के लिए अगले महीने हैदराबाद में जुट रहे हैं।ऑल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन (एआइपीईएफ) के अध्यक्ष और पंजाब राज्य बिजली बोर्ड के पूर्व मुख्य अभियंता पदमजीत सिंह ने दैनिक जागरण से कहा कि फुकुशिमा और जैतापुर के अलावा एक साथ 1650 मेगावाट की छह इकाइयों जैसी क्षमता विस्तार की कोशिश दुनिया में कहीं नहीं की गई। साथ ही करीब 22 करोड़ रुपये प्रति इकाई के संयंत्रों से पैदा होने वाली बिजली की लागत और खरीद पर भी स्थिति साफ नहीं है। ऐसे में इस बात का बहुत बड़ा खतरा है कि एनरॉन की तरह नाभिकीय क्षमता विस्तार की योजना भी बहुत बड़ा सफेद हाथी हो जो देश के गले की हड्डी बन जाए। वहीं नाभिकीय और ताप विद्युत उत्पादन इकाइयों के संचालन, संरक्षा से जुड़ी की दिक्कतों और प्रशिक्षित मानव संसाधन का हवाला देते हुए सिंह इस पर पुनर्विचार की वकालत करते हैं। उन्होंने बताया कि इस विरोध को धार देने के लिए सरकारी उपक्रमों के कर्मचारी संगठन पांच जून को हैदराबाद में जुटेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। हालांकि अमेरिका समेत कई मुल्कों से नाभिकीय करार और क्षमता विस्तार योजनाओं की रोशनी में आने के महीनों बाद अब विरोध क्यो? इस सवाल पर सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारियों के संगठन एनसीओए के अध्यक्ष के.अशोक राव कहते हैं कि फुकुशिमा हादसे ने सबको हिलाकर रख दिया है। भारत हैवी इलेक्टि्रकल्स से कुछ समय पहले सेवा निवृत्त इंजीनियर राव कहते हैं कि एक थर्मल पावर स्टेशन में बॉयलर फटने या चिमनी गिरने जैसा भीषणतम हादसा भी किसी नाभिकीय दुर्घटना की तुलना में कहीं कम खतरनाक है। राव आयात पर जोर वाले यूपीए सरकार के नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम को होमी जहांगीर भाभा की कल्पना के भी विपरीत बताते हैं जिसमें स्वदेशी पर जोर था।