बिजली खरीद-फरोख्त में घोटाले का आरोप-- अमर उजाला

Submitted by VK Gupta on Mon, 20/06/2011 - 6:32am

बिजली खरीद-फरोख्त में घोटाले का आरोप
जूनियर इंजीनियर्स फेडरेशन के महासचिव ने लगाए आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
मिर्जापुर। टूजी स्पेक्ट्रम जैसा घोटाला बिजली विभाग में भी हो रहा है। एक तरफ निजी कंपनियों को पावर कार्पोरेशन द्वारा कम काफी कम कीमत पर बिजली बेची जा रही है जिससे वह दो गुने दाम पर बेच रही हैं। वहीं प्रदेश में बिजली संकट के नाम पर निजी कंपनियों से जो बिजली खरीदी जा रही है उसकी औसत दर भी दो गुने से अधिक है। ये आरोप लगाया है रिटायर्ड मुख्य अभियंता बिजली विभाग व सेक्रेटरी जनरल आल इंडिया अवर इंजीनियर्स फेडरेशन शैलेंद्र दूबे ने।
वे शनिवार को एक बैठक के सिलसिले में नगर में मौजूद थे। उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में जो तथ्य सामने रखें वे सचमुच चौंकाने वाले थे। उन्होंने कहा कि तीन चरणों में विभाग में घोटाले हो रहे हैं। अव्वल तो यह कि आगरा में अहमदाबाद की टोरेंट कंपनी को वितरण का टेंडर अगले 20 साल के लिए दिया गया है। लेकिन कंपनी के लिए जो दाम तय किए गए हैं वह उससे पावर कार्पोरेशन को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि टोरेंट को पावर कार्पोरेशन द्वारा बनाई गई बिजली मात्र 1 रुपये 80 पैसे प्रति यूनिट की दर से दी जा रही है। जबकि लागत पड़ रही है 3 रुपये 17 पैसे प्रति यूनिट। इससे कार्पोरेशन को प्रति यूनिट 1 रुपये 37 पैसे का घाटा सहना पड़ रहा है। साल भर में उसे दो सौ करोड़ यूनिट बिजली मुहैया कराई जाएगी जिससे 27 करोड़ का घाटा प्रतिवर्ष होगा बीस वर्ष में यह घाटा 5400 करोड़ तक पहुंच जाएगा। वहीं इस बिजली को टोरेंट 4 रुपये 50 पैसे प्रति यूनिट की दर से बेच रही है। इतना ही नहीं जिन निजी कंपनियों को इतने कम दर पर पावर कार्पोरेशन से बिजली मुहैया कराई जा रही है उनसे जब बिजली खरीदने की बात आ रही है तब भी विभाग को घाटा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी वर्ष होने के कारण जनता को ज्यादा से ज्यादा बिजली देने के नाम पर 1400 मेगावाट बिजली की खरीददारी का करार निजी बिजली उत्पादन इकाइयों से किया गया है। लेकिन एक तरफ जहां निजी कंपनियां पावर कार्पोरेशन की बिजली 1 रुपये 80 पैसे में खरीद रही हैं वहीं वह सरकार को जो बिजली दे रही हैं उनका दाम 4 रुपये 72 पैसे तय हुआ है। इससे घोटाले और घपले की बू साफ आ रही है। उन्होंने नए लगाए जाने वाले बिजल घरों पर भी सवाल उठाया। कहा कि सूबा बिजली संकट से गुजर रहा है यह दिखाकर मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग के तहत 20000 मेगावाट के बिजली घरों के निर्माण की इजाजत निजी घरानों को दी गई है। इसमें भी उन्होंने भारी घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगाया है। जिससे कि सरकार को फिर इन से महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यदि इन तीनों को मिला दिया जाए तो यह टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले की तरह ही एक बड़ा घोटाला बनकर उभरेगा। उन्होंने इसकी जांच कराने की मांग की है।